ERCP क्यों
- पित्त नली की पथरी निकालने के लिए
- नली रुकने से हुए पीलिया में स्टेंट डालने के लिए
- पित्ताशय की सर्जरी के बाद पित्त के रिसाव के लिए
- सिकुड़ी पित्त नली से सैंपल लेने के लिए
- क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस में कुछ नली संबंधी समस्याओं के लिए
आजकल ERCP लगभग सिर्फ़ इलाज के लिए होता है। निदान के लिए MRCP और EUS ज़्यादा सुरक्षित हैं।
कैसे किया जाता है
- गहरा सेडेशन या एनेस्थीसिया दिया जाता है।
- बगल में देखने वाला एंडोस्कोप मुँह से ड्यूओडिनम में पैपिला के पास जाता है।
- पतली ट्यूब नली में डाली जाती है, डाई डालकर X-ray पर देखा जाता है।
- मुँह को छोटे चीरे से चौड़ा किया जाता है (स्फ़िंक्टेरोटॉमी), और बैलून या बास्केट से पथरी निकाली जाती है या स्टेंट डाला जाता है।
आमतौर पर 30–60 मिनट।
तैयारी
6 घंटे खाना नहीं। ख़ून पतला करने वाली दवाएँ रोकनी पड़ सकती हैं — पहले से बताएँ। ख़ून की जाँचें (थक्का बनना समेत) होती हैं।
जोखिम — ईमानदारी से
| जोखिम | प्रकाशित अध्ययन क्या कहते हैं |
|---|---|
| ERCP के बाद पैंक्रियाटाइटिस | सबसे आम जटिलता, लगभग 3–10%; ज़्यादातर हल्की। कम करने के लिए दवाएँ और तकनीकें इस्तेमाल होती हैं। |
| ख़ून बहना | कम होता है; अक्सर एंडोस्कोपी से ही रुक जाता है। |
| संक्रमण | कम होता है; ज़रूरत पर एंटीबायोटिक। |
| छेद (परफ़ोरेशन) | बहुत दुर्लभ। |
सहमति से पहले ये सब आपसे चर्चा किया जाता है। ERCP तभी, जब फ़ायदा जोखिम से साफ़ तौर पर ज़्यादा हो।
बाद में
कुछ घंटे निगरानी; कई लोग एक रात रुकते हैं। पहले तरल, फिर खाना। बढ़ता पेट दर्द, बुख़ार या काला मल हो तो तुरंत बताएँ।
आम सवाल
क्या ERCP के बाद सर्जरी चाहिए?
अगर पथरी पित्ताशय से आई है, तो नई पथरी न आए इसलिए बाद में पित्ताशय निकलवाने की सलाह दी जाती है। ERCP में चीरा नहीं होता।
क्या स्टेंट निकालना पड़ता है?
प्लास्टिक स्टेंट आमतौर पर लगभग 3 महीने में निकाले या बदले जाते हैं। लिखित याद-पर्ची दी जाती है — छूटने न दें।
क्या ERCP ऑपरेशन है?
नहीं। यह मुँह से की जाने वाली एंडोस्कोपिक प्रक्रिया है। ज़्यादातर लोग एक-दो दिन में घर चले जाते हैं।